रविवार, 24 सितंबर 2017

कहानी कैसे बनी

"कहानी शब्द का जन्म कैसे हुआ होगा जो कही जाए वह कहानी"फिर कही जाने वाली बात को कोई कहने वाला भी तो होना चाहिए कहने वाला कौन है वही जिसके पास समय हो, जिसके पास कल्पना, अनुभवों का भंडार हो और भाषा पर अधिकार ऐसा व्यक्ति तो कोई अनुभवी वृद्ध ही हो सकता है!
जिसके पास अपने छोटे-छोटे से बच्चों के लिए मन में प्यार अपार हां कौन होगा कौन होगी, "कहो नानी -कहो नानी" कहानी कहते कहते कहीं कहानी शब्द तो नहीं बन गया. तर्कसंगत तो लगता है हां कहानी शब्द ऐसे ही बना होगा पहले  पढ़ने-पढ़ाने के लिए दो उद्देश्य होते थे

1ज्ञान प्राप्ती
2 आनंद प्राप्ति
अब जुड़ गए हैं
1जीने की कला
2 कुछ बनने के लिए

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जीने की कला से तात्पर्य रोजी रोटी कमाना और स्वस्थ जीवन जीना है तो कुछ बनने से तलब मानवता पर अपनों को अपनाना है कि हम मानव या इंसान के रूप में क्या है कहानी है सब देती है सिखाती है राह दिखाती है कहानियां स्वभाविक रुप से हमारे भीतर अच्छी होती हैं 2 वर्ष का शिशु भी कहानी सुनने की इच्छा रखता है

अपनी नानी, दादी की गोद में बैठ उसके मुंह पर अपने म हाथ फेरते हुए कहानी सुनने का आनंद उठाता है की कहानियां बालकों में पठन के प्रति रुचि जगाने वाली होती है यह सरल होती हैं जिंहें बच्चा स्वयं आनंद लेकर पढ़ सकता है
शुभ संस्कृत साहित्य में रुचि उत्पन्न करने वाली यानी कि अच्छे विचारों के द्वारा  छात्रों के मन में सुरुचि को बढ़ाने वाली होती है साहित्य समाज का दर्पण है इसकी के अनुसार इसमें समाजिक समस्याओं प्रकट करती हो  समाधान की ओर भी संकेत रहते हैं और छोटी अवस्था के बालक  भावुक होते हैं उन्हें छोटी से छोटी प्रभावित करती है और यही समय है जब उनमें  विकास होता है तो आज के लिए इस अंत में यही कहूंगा की कहानी सुनिए और सुनाइए पढ़िए और और पढ़ाइए

धन्यवाद
 शुभेच्छुक

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